Meera Charit in Hindi By Saubhagya Kunvari Ranavat

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पुस्तक का विषय व प्रस्तुति मीरा चरित पुस्तक सौभग्य कुंवरी राणावत

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पुस्तक का विषय व प्रस्तुति

मीरा चरित पुस्तक सौभग्य कुंवरी राणावत द्वारा मीरा के जीवन का अध्यन करके लिखी गयी पुस्तक है |

मीरा भगवान् श्री कृष्ण की अनन्य भक्त है, इस पुस्तक में लेखक ने मीरा के जन्म, नामकरण

संगीत और योग के शिक्षण से लेकर सगाई की चर्चा व संत रैदास जी के चरण आश्रय,

विवाह तथा लोगो की कानाफूसी के साथ-साथ मीरा के भक्ति पूर्ण पारिवारिक जीवन की चर्चा की है |

लोगो द्वारा मीरा की आलोचना और टीका टिप्पणियां जैसे विषयों को भी स्पर्श किया है |

मीरा की भक्ति भावावेश में क्या दशा होती थी, भोजराज का पश्चाताप,

राणा का षड़यंत्र, विष का प्याला का भी संस्मरण इस पुस्तक में है |

शयन कक्ष में पर पुरुष, भूतों प्रेतों का घर तथा गोस्वामी तुलसीदास का पत्र जैसी लोकप्रसिद्ध सत्य कथाएं इस पुस्तक में हैं |

सांप का पिटारा, चित्तौड़ का परित्याग, वृन्दावन धाम में वास और श्री जीव गोस्वामी जी से मिलन की कथा इस पुस्तक में है |

 पुस्तक की छपाई व अन्य जानकारी 

यह पुस्तक मध्यम आकार में प्रस्तुटी है जो की यात्रा में अपने साथ लेकर जाने हेतु सुलभ है |

इस पुस्तक की छपाई अच्छे पृष्ठों पर की गयी है जिसे यदि संभाल से रखा जाए तो वर्षो तक चल जाएगी व एक ही पुस्त्रक को सैंकड़ो लोग पढ़ कर लाभ ले सकते हैं व मीरा के जीवन से जुड़कर प्रेरणा पा सकते हैं |

 इस पुस्तक में कुल तीन सौ निन्यानवे (३९९ - 399) पृष्ट-पन्ने हैं |

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