Bhavprakashnighantu (Vishwanath Dwivedi Shastri) (भावप्रकाशनिघण्टुः)

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मानव-शरीर-रचना (तीन खण्डों में) डॉ॰ मुकुन्दस्वरूप वर्मा

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मानव-शरीर-रचना (तीन खण्डों में)

डॉ॰ मुकुन्दस्वरूप वर्मा

सम्पूर्ण चिकित्साशास्त्र जिन तीन मूल आधारों पर आश्रित है उन्हें शरीर-रचना-विज्ञान, शरीर-क्रिया-विज्ञान और विकृतिविज्ञान कहते हैं। इनमें शरीर-रचना का स्थान महत्त्वपूर्ण है। यह ग्रन्थ तीन खण्डों में विभाजित है:

प्रथमखण्ड में ऊतकविज्ञान (Histology), भ्रूणविज्ञान (Embryology) और अस्थिविज्ञान (Osteology) विषयों का वर्णन है।

द्वितीयखण्ड में सन्धिविज्ञान (Syndesmology), मांसपेशीविज्ञान (Myology) और वाहिकाविज्ञान (Angiology) विषयों का समावेश किया गाय है।

तृतीयखण्ड में शरीर-रचना-सम्बन्धी तीन मुख्य प्रकरणों—तंत्रिकातन्त्र (Neu Tology), ज्ञानेन्द्रियाँ और त्वचा (Organs of Special Senses and Skin) तथा आशयप्रकरण (Splanchnology) को लिया गया है।

आधुनिक चिकित्साशास्त्र

आयुर्वेद महामहोपाध्याय श्री धर्मदत्त वैद्य

प्रस्तुत पुस्तक में रोगों के निदान-कारण, लक्षण और उनके भेद-प्रभेद बताकर साथ ही उनकी चिकित्सा का उपाय दिया गया है। किसी भी रोग के सूक्ष्म लक्षणों पर प्रकाश डालने के बाद तदनुसार ही औषधियों का निर्देश किया गया है।

कहाँ पेटेंट औषधियाँ उपयुक्त होती हैं और कहाँ नवीन औषधियाँ लाभ पहुँचाती हैं? स्त्रियों, पुरुषों एवं बच्चों में होने वाले विभिन्न प्रकार के रोगों में विभिन्न प्रकार की कौन-सी औषधियाँ रामबाण होती हैं? यह सब अनुभवी लेखक ने पुस्तक में विस्तारपूर्वक दिया है।

इस ग्रन्थ की यह विशेषता है कि इसमें आधुनिक काय-चिकित्सा के वर्णन के साथ-साथ आयुर्वेदिक काय-चिकित्सा का भी उल्लेख किया गया है? ये दोनों चिकित्सा पद्धतियाँ एक-दूसरे की सहायक सिद्ध हुई हैं।

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